Types of Milling Machine Hindi

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           Types of Milling Machine Hindi

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Types of Milling Machine Hindi


       मिलिंग मशीन (Milling Machine) एक बहुगुणी (Versatile) मशीन टूल है। जिसके द्वारा अनेक प्रकार की संक्रियायें घूमने वाले बहुमुखी कटर (Multi Point Cutter) की सहायता से की जाती है । यह कटर मिलिंग मशीन स्पिण्डल (Spindle) के ऊपर आरबर (Arbor), एडाप्टर (Adaptor) या कालेट चक्क (Collet Chuck) से पकड़कर चलाये जाते हैं। और घूमते हुए कटर के नीचे जॉब को गुजार कर उसके तलों आदि का निर्माण किया जाता है। यह कटर भिन्न-भिन्न साइज व आकार में निर्मित किये जाते हैं। जिनके द्वारा हर प्रकार का कार्य करना आसान हो जाता है । मिलिंग मशीन  का सर्वप्रथम आविष्कार 1770 ई० में फ्रांस में हुआ था। फिर इस मशीन का विकास जाँक डी० बौकान्सन (Jock D. Baukanson) ने 1782 में किया। इसके पश्चात् सादी मिलिंग मशीन (Plane Milling Machine) का डिजाइन ऐलीबिट (Alibit) ने 1818 में तैयार किया। तथा इस मशीन का सही प्रयोग करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के कटरों (Cutters), कटाई (Cutting) एवं फीड गतियों (Feed Speed) का सम्पूर्ण परिचय कराया और यह सिद्ध किया कि यह मशीन भी खराद मशीन (Lathe Machines)की तरह कटाई के लिए प्रयोग की जाती है तथा बहु-उत्पादकीय (Mass Production) कार्यों के लिए यह  मशीन उपयोगी है। तथा मेटल कटिंग के लिए शेपर मशीन (Shaper Machine) एवं प्लेनर मशीन (Planer Machine) आदि मशीनों की अपेक्षा अधिक उपयोगी है । इस परिचय को लेकर सन् 1861 में जोसफ आर० ब्राउन (Joseph R Brown) नामक इंजीनियर ने सर्वप्रथम मिलिंग मशीन का सुधरा हुआ रूप (Design) तैयार किया। यह इंजीनियर ब्राउन एण्ड शार्प कम्पनी का सदस्य था जो कि आज भी प्रसिद्ध है।

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       कार्य सिद्धान्त (Working Principle)-

             मिलिंग मशीन पर किसी भी वर्क को करने के लिए जॉब को मशीन टेबल पर मजबूती से क्लैंप जाता है। और कटर को आरबर अथवा स्पिण्डल में लगा दिया जाता है । कटर एक निर्धारित चाल पर घूमता है तथा जॉब को धीरे-धीरे कटर के नीचे से गुजारा जाता है। अतः जब जाॅब आगे को बढ़ते हुए कटर के सम्पर्क में आता है तो कटर के दाँते (Teeth) उसमें से चिप्स के रूप में मेटल को काटते हैं । टेबल पर कसे जॉब को लंबाई में (Longitudinal), क्रॉस मे (Cross-Wise) तथा ऊंचाई में (Vertical) तीनों दिशाओं में फीड दी जा सकती है।

 मिलिंग मशीनों का डिजाइन (Design of Milling Machines)

 (i) वर्गीकरण (Classification)-मिलिंग मशीन का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जा सकता है :


1. स्पिण्डल की स्थिति के अनुसार (By Position of Milling Spindle)-

(i) हॉरिजेन्टल स्पिण्डल (Horizontal Spindle) 

(ii) वर्टीकल स्पिण्डल (Vertical Spindle) 

(iii) हॉरिजेन्टल एवं वर्टीकल स्पिण्डल (Horizontal and Vertical spindle)|


2. मिलिंग स्पिण्डलों के संख्या के आधार पर (By. the Number of Milling Spindles)-

एक दो या इससे अधिक (one, two or more milling spindles)!

        कार्य के अनुसार मिलिंग मशीन का वर्गीकरण अनेक प्रकार से किया जाता है । मुख्य रूप से इस मशीन का चुनाव कार्य की प्रकृति के अनुसार किया जाता है तथा कार्य के साइज पर भी ध्यान दिया जाता है । सामान्यत: डिजाइन के आधार पर यह कई रूपों तथा साइजों में तैयार की जाती हैं।

3. डिजाइन के आधार पर (By design)


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1. स्तम्भ और नी टाइप मिलिंग मशीन (Column and knee type milling machine)-

          Vvइस प्रकार की मिलिंग मशीन प्रायः मशीन शॉप में सबसे अधिक उपयोग की जाती है । इस मशीन की टेबल नी पर रखी होती है । यह नी स्तम्भ (Column) के ऊपर बने खड़े मार्गों पर फिट किया जाता है। इस भाग को गति देने से टेबल ऊपर-नीचे विभिन्न ऊँचाइयों पर कहीं भी उठाया जा सकता है टेबल को विभिन्न गतियाँ देने वाली यन्त्रावली भी इसी भाग में फिट की होती है । स्तम्भ और नी प्रकार की मिलिंग मशीन का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जाता है


(क) दस्ती मिलिंग मशीन (Hand Milling Machine)-

             यह मिलिंग मशीन सबसे सरल टाइप की होती है तथा छोटे व सिंपल क्रियाओं को करने के लिए इस मशीन का प्रयोग किया जाती है । इस मशीन की तीनों फीड गतियाँ हाथ के द्वारा दी जाती हैं। यह मशीन विशेषकर छोटे स्लॉट, की वे, खाँचे काटने के लिए बहुत उपयोगी रहती है।


(ख) सादी मिलिंग मशीन (Plain Milling Machine)–

            यह मशीन बनावट व डिजाइन में हैंड मिलिंग मशीन से अधिक मजबूत तथा बड़े साइज की होती है । इस मशीन का आरबर भी हॉरिजेंटल (Horizontal) होता है। इस मशीन को गति हाथ व स्वचालित दोनों प्रकार से दी जा सकती है।

         इस मशीन का टेबल समकोण पर स्थित होता है जिससे मशीन द्वारा सभी सादी मिलिंग क्रियाएँ (Plain Milling Operation) आसानी से की जा सकती है।

(ग) यूनीवर्सल मिलिंग मशीन (Universal Milling Machine)-

              यह मशीन भी प्लेन मिलिंग मशीन की तरह ही होती है। परन्तु अन्तर यह है कि इस मशीन के टेबल को 0° से 45° के बीच में बायें, दायें घुमाकर कहीं भी सैट किया जा सकता है। टेबल की इस कोणिक गति के कारण हैलिक्स (Helix)अर्थात् हैलिकल गीयर दांते (Gear Teeth), स्लॉट (Slot) व ग्रूव (Groove)आदि आसानी से कटिंग किए जा सकते हैं। इस मशीन की कार्य क्षमता को बहुत से अटैचमेंट्स (Attachments) के द्वारा बढ़ा दिया गया है । जैसे-रैक कटिंग अटैचमैंट (Rack Cutting Attachment) स्लॉटिंग अटैचमैंट (Slotting Attachment), रोटरी टेबल (Rotory Table), यूनीवर्सल वर्टीकल मिलिंग अटैचमैंट (Universal Vertical Milling Attachment) व इन्डैक्स हैड अटैचमैंट (Index Head Attachments) इत्यादि ।

     उपक्रमों (Attachments) की सहायता से हर प्रकार के गियर (Gears), कटर्स (Cutters), कैमस (Cams), ड्रिल (Drill), रीमर्स (Reamers),डाई व पंच (Die and Punch),जिग व फिक्सचर (Jig and Fixture) तैयार किये जा सकते हैं। टूल रूम में प्रायः यही मशीन प्रयोग में लाई जाती है।


(घ) ओमनीवर्सल मिलिंग मशीन (Omniversal Milling Machine)-

             यूनिवर्सल मिलिंग मशीन के टेबल की अपेक्षा इस मशीन के टेबल को खड़े तल (Vertical Plain) में भी नीचे से ऊपर व ऊपर के नीचे किसी भी कोण पर घुमाकर बांधा जा सकता है इस प्रकार इस मशीन के टेबल को अपेक्षाकृत अधिक गति दी जा सकती है । अर्थात् पांच प्रकार की फीड गतियाँ (Feed Movements) दी जा सकती हैं। जैसे

1. लम्बाई की ओर (Longitudinal)

 2. अन्दर व बाहर की ओर अर्थात् चौड़ाई की ओर (Crosswise) 

3. खड़े पक्ष (ऊपर-नीचे) (Up and Down) 

4. कोणक लेटे हुए तल में (Horizontal Angular) 

5. कोणक खड़े तल में (Vertical Angular) ।


टेबल की इस अतिरिक्त गति की व्यवस्था के कारण हैलिकल (Helical) या बैवल गियर्स (Bevel Gears), कैमस (Cams) स्पेशल डाइज व टूल्स की प्रोफाइल (Profile) की मशीनिंग (Machining) सरलता से की जा सकती है। यह मशीन प्रायोगिक शॉप, (Labs) व टूल रूम में मूल रूप से प्रयोग की जा सकती है।


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(ड़) वर्टिकल मिलिंग मशीन (Vertical Milling Machine)-

            इस मशीन के स्पिण्डल की दिशः लम्बवत् (Vertical) होती है तथा स्पिण्डल हैड (Head) को दोनों ओर 0° से 90° किसी भी कोण पर घुमाकर क्लैंप जा सकता है। इस मशीन के स्पिण्डल को भी ड्रिलिंग मशीन की तरह नीचे व उपर किया जा सकता है । इस मशीन पर ड्रिल्स (Drills), एण्ड मिल (End Mill), शैल एण्ड मिल्स (Shell End Mills), फेसिंग कटर्स (Facing Cutters) और कुछ इसी प्रकार के शैंक वाले कटर्स भी क्लैंप जा सकते हैं । जिनके द्वारा टी-स्लॉट (T-slot), डव टैल (Dove Tail), सैगमेंट (Segment), ग्रूविंग (Grooving), बोरिंग (Boring) ड्रिलिंग (Drilling), रिसैसिंग (Recessing), कैम मिलिंग (Cam Milling), प्रोफाइलिंग (Profiling),डाइसिंकिंग (Die Sinking) इत्यादि मिलिंग संक्रियायें की जा सकती है 


: (च) रैम टाइप मिलिंग मशीन (Ram Type Milling Machine)-

               इस मशीन में कटर हैड (Cutter Head) एक रैम के फेस (Face) पर लगा होता है । जिससे कटर हैड को खड़े (Vertical) और हॉरिजेन्टल प्लेन (Horizontal Plain) में किसी भी कोण पर घुमाकर दोनों ओर सैट किया जा सकता है और रैम जिसमें स्पिण्डल (Spindle) लगा होता है जिसे अन्दर एवं बाहर की ओर क्रास फीड (Cross Movement) दी जा सकती है । इस प्रकार की मशीन में वर्क टेबल (Work-Table) को सैडल (Saddle) पर नट बोल्ट की सहायता से कालम (Column) के ऊपर बने खड़े पक्ष के मार्गों के ऊपर फिट किया होता है अर्थात् सैडल पर लगे वर्क-टेबल को लम्बाई की ओर तथा ऊपर-नीचे गति देने का भी प्रबन्ध रहता है । इस मशीन के साथ बहुत से उपकरण (Attachment) होते हैं जिनकी सहायता से इस मशीन की कटाई संक्रियाओं को बढ़ाया जा सकता है। यह भी प्रायोगिक शॉप के लिए बड़ी उपयोगी मशीन है।


2. निर्माण या स्थिर आधार प्रकार की मिलिंग मशीन (Manufacturing or Fixed Bed Type Milling Machine) –

             जैसा कि इनमें नाम से पता चलता है कि इन मशीनों के टेबल,बैड के ऊपर स्थिर (Fixed) रहते हैं और इन्हें केवल मात्र लांगीच्यूडीनल (Attachment) दी जा सकती है अर्थात् इनके टेबल न तो ऊपर-नीचे और न ही क्रास दिशा में चल सकते हैं। इन मशीनों के बैड फिक्स होने के कारण इन पर भारी कट लगाये जा सकते हैं।

इन मशीनों में एक लम्बवत् कॉलम होता है। जिस पर स्पिण्डल हैड चलने के लिए मार्ग बने होते हैं। इस स्पिण्डल में आरबर (Arbor) लगी होती है। कार्य पर कट लेने के लिए स्पिण्डल हैड को कालम पर बने मार्गों पर ऊपर-नीचे किया जाता है और कार्य को टेबल पर इस प्रकार क्लैंप जाता है कि कार्य की मशीनिंग कटर के नीचे से केवल एक ही बार निकलने पर पूरी हो जाये । यह मशीनें अपेक्षाकृत भारी और सुदृढ़ होने के कारण बहु-उत्पादकीय कार्यों के लिए प्रयोग की जाती है। इन मशीनों का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया गया है ।


(क) सिम्पलैक्स मिलिंग मशीन (Simplex Milling Machine)-

                इस मशीन में केवल एक ही स्पिण्डल हैड (Spindle Head) होता है जिसमें आरबर लगाकर कटर को पकड़ा जाता है। ये स्पिण्डल हैड कार्य की ऊँचाई के अनुसार कॉलम पर कहीं भी ऊपर या नीचे कसा जा सकता है।


(ख) डुप्लैक्स मिलिंग मशीन (Duplex Milling Machine)-

                इस मशीन पर दो अलग-अलग कटर हैड (Cuttter Head) लगे होते हैं। यह कटर हैड बैड के पक्षों पर फिट किये हुये दो कॉलमों (Columns) पर ऊपर व नीचे स्लाइड करके एडजस्ट किए जाते हैं। इन कटर हैडस को एक साथ अथवा अलग-अलग भी प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रकार इस मशीन पर दो तलों को एक साथ मशीनिंग किया जा सकता है।


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(ग) ट्रिप्लैक्स मिलिंग मशीन (Triplex Milling Machine)-

            इस मशीन में डूप्लैक्स मिलिंग मशीन की तरह दो कटर हैड (Cutter Head) फिट किये होते हैं। तीसरा कटर हैड कॉलम के ऊपर फिट की हुई क्रास-रेल (Cross-Rail) पर लगा होता है। यह कटर हैड कटाई के लिए भिन्न-भिन्न गतियों पर चलाया जा सकता है। इन कटर हैड को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर कटाई क्रियाओं के लिए शीघ्रता से ले जाया जा सकता है। इन मशीनों द्वारा कटाई क्रिया क्रमबद्ध ढंग से निरंतर होती रहती है। जिसमें एक ही प्रकार के कार्य करने में आसानी होती है । इन मशीनों के टेबल की गतियाँ जैसे कि धीमी फीड गति (Slow Feed Motion),शीघ्र वापसी गति (Quick Return Motion), स्टार्ट (Start), स्टाप एण्ड ब्रेक लीवर (Stop and Brake Lever) के प्रयोग से इन मशीनों की उपयोगिता अधिक बढ़ गई है।


3. प्लेनर टाइप मिलिंग मशीन (Planer type Milling Machine)-

              इसे प्लेनो (Plano) मिलिंग मशीन भी कहते हैं। यह बनावट में प्लेनिंग मशीन जैसी होती हैं। यह एक भारी भरकम मशीन है। इस मशीन के क्रास-रेल (Cross-Rail) पर टूल हैड (Tool Head) के स्थान पर कटर हैड (Cutter Head) लगे होते हैं। कार्य ऊँचाई के अनुसार क्रास-रेल की ऊँचाई को हाऊसिंग पर ऊपर या नीचे कहीं भी एडजस्ट (Adjust) किया जा सकता है । यह कटर हैड एक से अधिक हो सकते हैं । कुछ मशीनों में प्लेनर की भांति हाऊसिंग की साइड पर एक या दो साईड कटर हैड लगे होते हैं। जिनके द्वारा एक ही समय में कार्य के तीनों तलों का निर्माण हो जाता है। ये कटर हैड स्वतन्त्र रूप में भी प्रयोग किए जा सकते हैं। फलस्वरूप उत्पादन समय में बहुत बचत होती है। प्लेनर मिलर (Miller) में मुख्य अन्तर उनकी टेबल गति में है। प्लेनों मिलिंग मशीन में टेबल की गति प्लेनर मशीन की अपेक्षा बहुत धीमी होती है। यह मशीन बहुत भारी कार्य तथा बड़े आकार के तलों की मशीनिंग के लिए बनाई गई है। प्रायः ऐसी मशीनों को चलाने के लिए 20 से 70 अश्व शक्ति की मोटरें लगी होती हैं जिस कारण यह मशीनें विशाल उत्पादन के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं

4. विशेष प्रकार की मिलिंग मशीन (Special Purpose Milling Machine)–

            यह मशीनें किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई गई हैं। इनके प्रयोग से उत्पादन को बढ़ावा मिला है तथा क्वालिटी (Quality) में भी सुधार हुआ है । इन मशीनों के प्रयोग से कार्य के खराब होने की सम्भावना बहुत कम होती है । इनके द्वारा निर्मित सभी पुर्जे एक ही आकार एवं साइज में बनते हैं जिनसे पार्ट्स में विनिमयशीलता (Interchangability) बनी रहती है। इन मशीनों का वर्गीकरण कार्य के अनुसार किया गया है।


(क) घूर्णी टेबल मिलिंग मशीन (Rotary table milling machine)-

              इस मशीन की टेबल गोल होती है। यह टेबल घूमते हुए कटर के नीचे जॉब को गुजारती है । इस मशीन पर एक से अधिक कटरों का भी प्रयोग  किया जा सकता है। इस मशीन पर लगातार कटिंग प्रक्रिया करने के लिए जॉब की लोडिंग और अनलोडिंग की जा सकती है यह मशीन प्रायः फेसिंग प्रक्रिया के लिए विशेष रूप से काम में लाई जाती है।


(घ) प्रोफाइलिंग मशीन (Profiling Machine)-

             यह मशीन बैड टाइप वर्टिकल मिलिंग मशीन के समान होती है। जिसमें स्पिण्डल (Spindle) को ऊपर व नीचे तथा लेटे हुए तल में आगे व पीछे चलाया जा सकता है । इस मशीन का प्रयोग पूरे आकार की टैम्प्लेट (Template) का प्रतिरूप, जॉब (Job) के ऊपर तैयार करने के लिए किया जाता है । इस मशीन में एक से लेकर चार तक स्पिण्डल हैड होते हैं जिनमें एण्ड मिल कटर पकड़ा जाता है । इस मशीन में कटर हैड की चाल को एक ट्रेसर या गाइड पिन (Tracer or Guide Pin) द्वारा नियन्त्रित किया जाता है । जो टैम्प्लेट के बाह्य सरफेस को स्पर्श करती हुई चलती है और इस प्रकार ट्रेसर वही मार्ग अपनाता है जैसा कि टैम्प्लेट की आकृति होती है । यह टैम्प्लेट जॉब के एक ओर टेबल पर फिट की हुई होती है इस मशीन को डाई सिंकिंग (Die Sinking) मशीन भी कहते हैं । यह मशीन स्पेशल डाई (Special Die) या टूल (Tool) आदि तैयार करने के लिए प्रयोग की जाती है।


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(ग) प्लेनेटरी मिलिंग मशीन (Planetary Milling Machine)-

              इस मशीन का यह नाम कटर का प्लेनेटरी पथ के अनुसरण करने के आधार पर पड़ा है। ये मशीनें लम्बवत स्पिण्डल हैंड (Vertical Spindle) अथवा हॉरिजेन्टल स्पिण्डल (Horizontal Spindle) में उपलब्ध है। इस मशीन पर बाह्य एवं आन्तरिक दोनों गोल तलों का अलग-अलग अथवा एक साथ निर्माण किया जा सकता है। इसमें कार्य स्थिर रहता है तथा कटाई अथवा फीड गतियाँ दोनों कटर को ही दी जाती हैं अर्थात् इसमें कटर नक्षत्र ग्रह पथ (Planetary Path) की भांति चलता हुआ जॉब के चारों और कटाई करता है और साथ-साथ आगे भी बढ़ता है । सामान्यतः इस मशीन का प्रयोग विभिन्न पिच की आन्तरिक एवं बाह्य चूड़ियां काटने के लिए होता है । 

   (घ) पेंटोग्राफ मिलिंग मशीन (Panto Graph Milling Machine)-

               यह मशीन दो या तीन विमीय (Dimensional) मॉडलों में मिलती है। दो विमीय पेन्टोग्राफ का उपयोग अक्षरों या अन्य डिजाइनों की नकल बनाने के लिए किया जाता है । तीन विमीय पेन्टोग्राफ का उपयोग हर प्रकार की आकृति या विषमतल (Contour) की नकल बनाने के लिए किया जाता है तथा साइज को अनुपात में घटाया व बढ़ाया जा सकता है । पेन्टोग्राफ एक ऐसी यन्त्रावली है जो चार छड़ों या लिंकों से मिलकर एक समानान्तर चतुर्भुज की आकृति में रहती है । इसी यन्त्रावली की सहायता से टैमप्लेट (Template) या मॉडल की आकृति के अनुरूप जॉब पर आकृति की साइज को अनुपात में घटाकर या बढ़ाकर बना सकते हैं । यह मशीन प्रायः खुदाई (Engraving) करने के लिए विशेष रूप से प्रयोग की जाती है।


(ड) ड्रम टाइप मिलिंग मशीन (Drum type Milling Machine)-

             यह मशीन रोटरी टेबल मिलिंग मशीन के समान होती है इस मशीन का टेबल जिसे ड्रम कहा जाता है गोलाई में एक साथ चार स्पिण्डल के नीचे घूमता रहता है। जिस पर मशीनी पुों को ड्रम का एक चक्कर पूरा हो जाने पर निकाल दिया जाता है। और उनकी जगह नये पुर्जे को क्लैम्प कर दिया जाता है। 



(च) ट्रेसर कन्ट्रोल मिलिंग मशीन (Tracer Control Milling Machine)-

              यह मशीन डाई (Die) व सांचों (Moulds) में विशेष प्रकार के तलों के निर्माण के लिए प्रयोग की जाती है । चाहे वे तल नियमित हों या अनियमित जॉब को फीड एक विशेष प्रकार की विधि जिसे सर्वो-मैकेनिज्म (Servo Mechanism) कहा जाता है द्वारा नियन्त्रित की जाती है। यह स्टाईलस (Stylus) बनाई गई टैम्प्लेट या कन्टूर की प्रोफाइल के अनुसार बने जॉब के गिर्द घूमता है। स्टाईलस की यह चाल एक ऑयल रिले सिस्टम (Oil Relay System) को चलाती है और इस प्रकार टेबल को द्रव चलित प्रणाली द्वारा चाल मिलने लगती है जिससे टेबल पर बंधा कार्य खण्ड अपने आप कटने लगता है ।


(छ) गियर होबिंग मशीन (Gear Hobbing Machine)-

             जैसे कि इसके नाम से पता चलता है कि यह मशीन उत्पादन दर पर केवल गरारियां काटने के लिए काम में लाई जाती है । इसमें हर प्रकार की गरारियां जैसे स्पर (Spur) हैलिकल (Helical) परिशुद्ध काटी जा सकती हैं। इसमें दांतों की कटाई के लिए हॉब कटर (Hob Cutter) का प्रयोग किया जाता है। इसमें हॉब कटर के साथ-साथ जॉब चूमता रहता है और दांतों की कटाई के लिए इंडेक्सिंग (Indexing) स्वयं ही मशीन द्वारा अपने आप होती रहती है । इस प्रकार एक समय में बहुत-सी गरारियां काटी जा सकती हैं । इस वर्ग के अन्तर्गत गारियां काटने वाली एक अन्य मशीन भी आती है जिसे गियर कहते हैं । इसका कार्य भी हॉबिंग से मिलता-जुलता है।

(ज) थ्रेड मिलिंग मशीन (Thread Milling Machine)-

              इस मशीन का प्रयोग धैड मिलिंग कटर द्वारा एक्मी अथवा वर्म चुड़ी आदि काटने के लिए किया जाता है क्योंकि इस संक्रिया द्वारा चूड़ियां अधिक शुद्धता और सफाई से काटी जाती हैं। सामान्यतः गल कटर का प्रयोग कोर्स पिच की चूड़ियां काटने के लिए तथा मल्टी टीथ कटर का प्रयोग कम लम्बे भागों पर चूड़ी काटने के लिए किया जाता है।


(झ) एन० सी० एवं सी० एन० सी० मिलिंग मशीनें (N.C. and C.N.C. Milling Machines)-                         आजकल आधुनिक शॉपों में एन. सी. और सी० एन० सी० मिलिंग मशीनें प्रयोग में लाई जाती हैं यह बहुत ही आधुनिक मशीनें हैं जॉब की ड्राईंग के नुसार प्रोग्राम बनाकर इसके कन्ट्रोल यूनिट में फीड कर दी जाती है।


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