कॉपर प्लेटिंग / इलेक्ट्रोप्लेटिंग क्या है? कॉपर इलेक्ट्रोप्लैटिंग के प्रकार, कॉपर इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्रोसेस

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कॉपर प्लेटिंग / इलेक्ट्रोप्लेटिंग Copper Plating / Electroplating

कॉपर का भी इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग में बहुत अधिक प्रयोग होता है। शायद ही कोई ऐसा इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट हो जो कॉपर प्लेटिंग न करता हो । जिंक प्लेटिंग के समान कॉपर इलेक्ट्रोप्लैटिंग काफी उपयोगी तो है ही कुछ स्थितियां ऐसी भी होती हैं जहां आप वस्तु की सतह पर तांबे की परत चढ़ाने या कॉपर प्लेटिंग करने के लिए मजबूर हो जाते हैं । 

यही कारण है कि एक कुशल इलेक्ट्रोप्लेटर को तांबे की प्लेटिंग की विविध विशिष्टताओं, उपयोगिताओं और उसके महत्व व सीमाओं की भली प्रकार पूर्ण जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक है जितना कॉपर प्लेटिंग बाथ्स के फार्मूलों और प्लेटिंग प्रक्रिया का विशुद्ध ज्ञान । कॉपर प्लेटिंग बहुत से उद्देश्यों की पूर्ति के लिए, बड़ी मात्रा में, लगभग सभी प्रकार की धातु सतहों पर की जाती है अतः इस आर्टिकल में कॉपर प्लेटिंग के विविध पहलुओं को विस्तार से जानेगे। 

कॉपर प्लेटिंग की उपयोगिता (The Uses of Copper Plating)

तांबा एक रक्त वर्णीय या लाल रंग की चमकीली और मध्यम मजबूती युक्त नयनाभिराम (redish-brown, smooth and bright) धातु है । यही कारण है कि सजावटी व नित्य उपयोगी बर्तन बनाने, मूर्तियां बनाने और धातु की कलात्मक कृतियां बनाने में इसका प्रयोग आदि काल से मानव समाज करता रहा। 

इसकी विद्युतवाहक क्षमता (Current Conductivity) ने इसे विद्युत उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण धातु बना दिया है तो इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग में दूसरी धातु की कोटिंग से पहले वस्तुओं पर इसकी कोटिंग तांबे के इसी गुण के कारण की जाती है। मुख्य रूप से तांबे की कोटिंग या कॉपर प्लेटिंग जिन-जिन कारणों से वस्तुओं पर की जाती है उन्हें नीचे लिखे वर्गों में बांटा जा सकता है ।

1. सजावट के उद्देश्य (Decorative Purposes) से कमरे की अलमारियों, टेबल आदि पर रखे जाने वाले सजावटी सामानों-फूलदानों, ऐश ट्रे, बर्तनों, मूर्तियों आदि -पर विभिन्न शेडों और मोटाई की कॉपर प्लेटिंग की जाती है। 

2. तांबा भारी और मूल्यवान धातु है अतः अन्य धातुओं के बने हुए पात्रों और मूर्तियों पर कॉपर प्लेटिंग करने का उद्देश्य उन्हें मूल्यवान बनाना होता है । 

3. विद्युत धारा के प्रवाह (electric current) को वहन करने की क्षमता तांबे में लगभग चांदी के समान ही होती है। यही कारण है कि प्राचीनकाल से आज तक बड़े-बड़े और ऊंचे भवनों को आकाश से गिरने वाली बिजली की भीषण चोट से बचाने के लिए भवन के सबसे ऊंचे भाग से नीचे जमीन की गहराई में काफी अन्दर तक तांबे की काफी मोटी और चौड़ी छड़ को लगा दिया जाता है। 

यह तांबे की छड़ भवन पर गिरने वाली बिजली की शक्ति को भवन के सभी भागों से खींच कर जमीन की गहराई में अन्दर पहुंचा देती है और भवन बर्बाद होने से बच जाता है।

तांबे के इसी गुण के कारण बिजली के तारों में तांबे का तार प्रयोग किया जाता है। बिजली की मोटर, आर्मेचर और डाइनमो की मोटरें भी तांबे के तार की बनाई जाती हैं और विद्युत उपकरणों-रेडियो, टी० वी०, फ्रिज, एयर कण्डीशनर-के विविध सर्किट आदि अन्य पार्ट तांबे के ही बनाए जाते हैं । आजकल लगभग ये सभी वस्तुएं तांबे की बनाने के बजाय अन्य धातुओं-बहुधा अल्यूमिनियम की बना ली जाती हैं और उन पर कॉपर की मोटी प्लेटिंग कर दी जाती है। 

4. कॉपर प्लेटिंग का सबसे अधिक उपयोग शायद अण्डर कोटिंग (under coating) के रूप में किया जाता है। विद्युत-धारा (current) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण चांदी और सोने के समान ही तांबे की परत भी अन्य धातुओं पर बहुत ही जल्द चढ़ जाती है। 

यही नहीं तांबे की कोटिंग चढ़ी हुई सतह पर दूसरी अन्य धातुओं की सतह भी अधिक शीघ्र और आसानी से चढ़ाई जा सकती है। यही कारण है कि अन्य धातुओं की प्लेटिंग करने से पहले बहुधा वस्तुओं की सतह पर कॉपर प्लेटिंग द्वारा तांबे की पतली सतह अण्डर-कोट के रूप में चढ़ा ली जाती है। 

5. एल्यूमिनियम, जिंक और सीसे जैसी मुलायम धातुओं पर तो निकेल आदि धातुओं की प्लेटिंग करते समय तांबे की अण्डर कोटिंग करना प्रायः अनिवार्य ही होता है । ढलवां जिंक व एल्यूमिनियम तथा सीसा तो इतने मृदु होते हैं कि यदि अधिक समय तक प्लेटिंग बाथ में पड़े रहें तो इनकी सतह खराब भी हो सकती है अत: पहले इन पर तांबे की कोटिंग की जाती है और फिर दूसरी धातु की प्लेटिंग की जाती है।

इस प्रकार आप देखते हैं कि तांबे की प्लेटिंग या कॉपर इलेक्ट्रोप्लेटिंग मात्र उन्हीं वस्तुओं पर नहीं की जाती जिन पर यह दिखलाई देती है। उससे भी अधिक यह उन वस्तुओं पर की गई होती है जहां यह अण्डर कोटिंग के रूप में दूसरी धातुओं की सतह के नीचे छिपी रहती है। 

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कॉपर बाथ्स का वर्गीकरण (Classification of Copper Baths)

लगभग सभी धातुओं के बाथ तेजाब, सायनाइड और अन्य रचकों में से किसी एक को प्रधान द्रव्य मान कर तैयार किए जा सकते हैं। कुछ धातुओं के बाथ बनाते समय उस धातु के साल्ट रूपों का अधिक प्रयोग होता है तो कुछ में सायनाइड रूपों का। परन्तु तांबा एक ऐसी धातु है जिसके बाथ बनाने में इस धातु के सर्वाधिक रूपों का प्रयोग किया जा सकता है। 

यही कारण है कि कॉपर प्लेटिंग बाथ को मोटे रूप से छह वर्गों में बांटा जा सकता है। इसमें प्रत्येक वर्ग के बाथ की अपनी विशेषताएं, सीमाएं और उपयोगिताएं हैं। लगभग सभी प्रकार की धातुओं, कांच और प्लास्टिक की बनी विभिन्न रंग-रूप और आकार-प्रकार की वस्तुआ पर मोटी-से-मोटी और पतली-से-पतली इलेक्ट्रोप्लेटिंग की जाती है अतः यह आवश्यक है कि किसी भी वस्तु पर कॉपर प्लेटिंग करने के लिए आप सही वर्ग के बाथ का ही चुनाव करें। 

1. एसिड कॉपर बाथ (Acid Copper Baths)

इस वर्ग के बाथों में तेजाबों, विशेषतः गंधक के तेजाब का प्रयोग किया जाता है । ये बाथ शीघ्रतापूर्वक कॉपर की मोटी कोटिंग चढ़ाने में समर्थ हैं। तेजाब पर आधारित होने के कारण मुलायम धातुओं-एल्यूमिनियम, जिंक, आदि-की बनी वस्तुओं पर प्लेटिंग चढ़ाने के लिए इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता। 

प्रायः ढलवां लोहे (cast iron) और इस्पात (steel) की बनी वस्तुओं पर मोटी कोटिंग चढ़ाने के लिए इस प्रकार के घोलों या मिश्रणों का प्रयोग प्राय: किया जाता है। ऊंची करेण्ट डेन्सिटी पर ये एसिड बाथ प्रयोग किए जाते हैं। 

2. सायनाइड आधारित बाथ (Cyanide Copper Baths)

बाथ के सायनाइड रूपों पर आधारित होने के कारण ये बाथ या घोल बहुत अधिक जहरीले होते हैं । परन्तु सबसे अधिक प्रयोग भी इस वर्ग के बाथों का ही किया जाता है। इन बाथ्स का प्रयोग ऊंचे तापमान पर बाथ को गर्म रखते हुए शुद्ध तांबे के एनोड्स के साथ किया जाता है और करेण्ट डेन्सिटी भी कुछ अधिक ही रखी जाती है। 

3. पायरोफॉस्फेट कॉपर बाथ (Pyrophosphate Copper Bath)

इस बाथ द्वारा एल्यूमिनियम और जिंक धातुओं की बनी बस्तुओं पर भी आसानी से कॉपर प्लेटिंग की जा सकती है । इस बाथ को प्रयोग करना सबसे सुगम तो है परन्तु यह अपेक्षाकृत अधिक महगा पड़ता है। अतः जिंक, एल्यूमिनियम आदि मुलायम धातुजों पर ही इसका प्रयोग अधिक किया जाता है जिन पर एसिड या सायनाइस बाथ से प्लेटिंग नहीं की जा सकती। वैसे इस बाथ से लोहा, इस्पात, पीतल, एसूमिनियम, जिंक आदि लगभग सभी धातुओं पर प्लेटिंग की जा सकती है। 

4. कॉपर रोचल बाथ (Copper Rochelle Bath)

कॉपर रोचल बाथ सायनाइड बाथ का ही परिष्कृत रूप है और धातुओं की सतह पर तांबे की बहुत पतली सतह (thin layer) चढ़ाने के लिए ही इसका प्रयोग किया जाता है। इस्पात से लेकर ढली हुई जिंक की वस्तुओं तक लगभग प्रत्येक प्रकार की सतह पर बहुत बारीक कॉपर परत चड़ाने में समर्थ होने के कारण इस बाथ का प्रयोग अण्डर कोटिंग के रूप में अधिक किया जाता है। 

5. फल्यूबोरेट कॉपर बाथ (Fluoborate Copper Bath)

वास्तव में फल्यूबोरेट कॉपर बाथ एक प्रकार का एसिड बाथ ही है परन्तु होता उससे मृदु है । यह बाथ बहुत अधिक करेण्ट डेन्सिटी पर कार्य करता है और काफी मंहगा पड़ता है अतः इस बाथ का प्रयोग बहुत ही कम किया जाता है । 

6. इलेक्ट्रोलाइज कॉपर बाथ (Electrolysed Copper Solution)

इलेक्ट्रोलाइज कॉपर बाथ को इलेक्ट्रोलेस कॉपर बाथ भी कहते हैं । बिना इलेक्ट्रोप्लेटिंग किए ही इस बाथ द्वारा वस्तुओं की सतह पर तांबे की प्लेटिंग की जा सकती है। यही कारण है कि प्लास्टिक तथा शीशे की बनी वस्तुओं (Plastic or glass goods) पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग करने से पहले इस बाथ द्वारा उन पर तांबे की हल्की सी परत चढ़ा ली जाती है। इससे उनकी सम्पूर्ण सतह पर विद्युतधारा (current) का प्रवाह होने लग जाता है और किसी भी धातु पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग करना संभव हो जाता है।

विविध धातुओं की इलेक्ट्रोप्लेटिंग करने के लिए तैयार किए जाने वाले बाथों में बाथ के वर्ग का नाम तो दिया जा रहा है जैसे एसिड बेस्ड बाथ या सायनाइड बेस्ड बाथ बादि परन्तु उस वर्ग के बाथ के विशेष गुणों, दोषों, सीमाओं और विशिष्टताओं का विस्तृत विवेचन नहीं दिया जा रहा। परन्तु कुछ संक्षिप्त जानकारी अवश्य दी गई है।कारण यह है कि सभी धातुओं के सायनाइड बाय अत्यधिक जहरीले होते हैं और एसिड बाथ तेज क्रियाशील । अत: उपरोक्त दिए गए प्रत्येक वर्ग के बाथ की विशिष्टताएं जो बताई गई हैं उस वर्ग के प्रत्येक बाथ पर लागू होंगी चाहे वह कॉपर बाथ हो या निकेल बाथ, सिल्वर बाथ हो या क्रोमियम बाथ। 

कॉपर प्लेटिंग / इलेक्ट्रोप्लेटिंग क्या है? कॉपर इलेक्ट्रोप्लैटिंग के प्रकार, कॉपर इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्रोसेस, कॉपर इलेक्ट्रोप्लेटिंग बाथ्स /घोल, कॉपर प्लेटिंग की उपयोगिता 

कॉपर प्लेटिंग बाथ्स Copper Plating Baths

जैसा कि आप जानते हैं लगभग हर प्रकार की सतह पर कार्य की मांग के अनुरूप अलग-अलग मोटाइयों में कॉपर प्लेटिंग की जाती है। नीचे हम विभिन्न प्रकारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी और बहुत अधिक प्रचलित कुछ कॉपर प्लेटिंग बायां या घोलों के पूर्ण फार्मूले, प्रयोग के लिए सहायक परिस्थितों और प्रयोग विधियों व सावधानियों के बारे में जानगें। सर्व प्रथम कार्य के अनुरूप सही बाथ का चुनाव, अतः बाथ का चुनाव सदैव पूर्ण सावधानी से करना चाहिए, चाहे आप कॉपर प्लेटिंग कर रहे हों या अन्य कोई प्लेटिंग। 

1. एसिड बेस्ड कॉपर वाथ (Copper Acid Bath)

इस घोल का प्रयोग वस्तुओं की सतह पर तांबे की मोटी परत चढ़ाने के लिए किया जाता है । इस घोल में गंधक का तेजाब काफी मात्रा में होता है, अतः लोहे और जिंक की वस्तुओं पर इसका सीधे ही प्रयोग नहीं किया जा सकता यद्यपि शीशे और प्लास्टिक (Glass or Plastic) की सतह पर इसे सीधे ही चढ़ाया जा सकता है। वैसे अच्छा तो यह रहता है कि किसी भी वस्तु की सतह पर इस घोल द्वारा तांबे की मोटी सतह चढ़ाने से पहले किसी अन्य घोल द्वारा उस पर कॉपर की पतली सतह चढ़ा ली जाए। 

इस प्रकार तांबे की बहुत बारीक सतह चढ़ जाने के कारण उस वस्तु की सतह तेजाब के प्रभाव से सुरक्षित भी रहेगी और उस पर प्लेटिंग भी शीघ्र चढ़ेगी। वस्तुओं पर कॉपर की मोटी सतह चढ़ाने के अतिरिक्त इस घोल का प्रयोग इलेक्ट्रोप्लेटिंग द्वारा डाइयां बनाने अर्थात् इलेक्ट्रोफार्मिग (electrofarming) के लिए अधिक किया जाता है। इस घोल का एक बहुप्रचलित फार्मूला पूर्ण प्रयोग विधि सहित नीचे दिया जा रहा है

(A) कॉपर सल्फेट (Copper Sulphate) 200 ग्राम 

(B) सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric Acid) 50 मिलीमीटर 

(C) फेनोल (Phenol) एक ग्राम

(D) डिस्टिल्ड वाटर (Distiled water) एक लीटर

इस घोल के मुख्य रचक तो सल्फ्यूरिक एसिड और कॉपर सल्फेट ही हैं प्रति लीटर मात्र एक ग्राम फेनोल तो एडीशन एजेन्ट के रूप में ही मिलाया जाता है ।

फेनोल को घोल में सीधा नहीं डाला जाता । सबसे पहले जितना फेनोल प्रयोग कर रहे हैं उसका दो गुना सल्फ्यूरिक एसिड उसमें मिलाकर उसे 120° सेण्टीग्रेड (248° फारेन०) पर एक घण्टे तक गर्म कर सल्फोनेट करलें तब घोल में मिलाएं।

फेनोल मिलाने के दो मुख्य लाभ हैं एक तो प्लेटिंग की सतह अत्याधिक चिकनी आती हैं और दूसरा सबसे बड़ा लाभ यह कि फेनोल मिला देने के बाद आप काफी ऊंची करेण्ट डेन्सिटी का प्रयोग करते हुए, बाथ को उच्चतम तापमान पर रखकर और सतह चढ़ाई जा रही वस्तुओं (केथोड Cathod) हिलाते हुए रखकर-बहुत तीव्र गति से प्लेटिंग की मोटी सतह चढ़ा सकते हैं । 

नीचे परिचालन स्थितियों में ताप व डेन्सिटी की न्यूनतम व अधिकतम दोनों ही मात्राएं दी जा रही हैं । जब करेंट डेन्सिटी बढ़ाएं उसी अनुपात में बाथ का तापमान भी बढ़ाते जाएं और केथोड्स को हिलाना भी शुरू कर दें। 

परिचालन स्थितियों व विधि (The Process)

(a) बाथ का तापमान (Temperature) 60° से 120° फारेनहाइट 

(b) करेण्ट डेन्सिटी (Current Density) 15 से 500 एम्पी० प्रति वर्ग फुट या 150 से 5000 एम्पी० प्रति वर्ग मीटर 

(c) करेण्ट एफीशियेन्सी (Current Efficiency) 95% से 97% 

(d) वोल्टेज (Voltage) एक से तीन वॉल्ट 

(e) एनोड्स (Anods) शुद्ध तांबे (कॉपर) के 

इस बाथ का प्रयोग सीसा अथवा रबर चढ़ी हुई (Lead or rubber lined) टंकी में किया जाता है। घोल को हिलाते रहने से अधिक अच्छा परिणाम प्राप्त होता है और ऊंची करेण्ट डेन्सिटी का प्रयोग करते समय तो घोल को निरन्तर हिलाते रहना आवश्यक है। 

इलेक्ट्रोप्लेटिंग विधि से डाइयां बनाते समय अथवा किसी गोलाकार रोलर, ट्यूब या शीट पर काफी मोटी सतह जमाने के लिए अन्तिम अवस्था में एक हजार एम्पीयर प्रति वर्ग फुट तक ऊंची करेण्ट डेन्सिटी का प्रयोग भी आप कर सकते हैं । जैसे-जैसे बाथ की करेंट डेंसिटी, तापमान आदि बढ़ाकर उसे तीव्रगति प्रदान की जाए उसी अनुपात में एनोड्स बढ़ाना भी आवश्यक है क्योंकि जैसे-जैसे वस्तुओं पर तांबे की सतह चढ़ने की गति में तीव्रता आती जाती है उसी गति में एनोड्स का घुलना भी तो आवश्यक है।

इस घोल में कभी-कभी कार्बनिक अशुद्धियां मिल जाती हैं अतः घोल को समय-समय पर ऐक्टीवेटेड कार्बन में से छानते रहना चाहिए। पम्प तथा फिल्टर ऐबोनाइट अथवा स्टेनलेस स्टील के ही प्रयोग करने चाहिए।

2. सायनाइड कॉपर प्लेटिंग बाथ (The Cyanide Bath)

सायनाइड कॉपर प्लेटिंग बाथ का प्रयोग उन धातुओं पर कॉपर प्लेटिंग करने में किया जाता है जिन पर एसिड कॉपर घोल एसिड के कारण सतह को खाने लगता है । जब किसी सतह पर काफी मोटी प्लेटिंग की जाती है तब पहले इस घोल से पतली सतह जमाकर एसिड घोल से मोटी तह जमाई जा सकती है। इस घोल को स्टील की टंकी या बैरल में रखना चाहिए। इस बाथ को क्षारीय घोल या अल्काइन बाथ (Alkaline Batb) भी कहा जाता है। 

(A) पोटेशियम सायनाइड (9% KCN) – 40 ग्राम 

(B) कॉपर सायनाइड (CuCN) -25 ग्राम 

(C) सोडियम बाइ सल्फाइट (NaHSon) – 3 ग्राम

(D) सोडियम कार्बोनेट (NasCos) – 6 ग्राम

(E) पानी (Distiled water) – 1 लीटर

परिचालन स्थितियों व विधि (The Process) 

(a) बाथ का ताप (Temp. of Bath) – 45°-60° सेन्टी० या 115° से 140° फा० 

(b) करेन्ट डेन्सिटी (C. D) – 50 से 100 ऐम्पियर वर्गमीटर 

(c) करेन्ट ऐफीशियन्सी (C. E) – 60% 

(d) वोल्टेज (Voltage) – तीन से चार वोल्ट 

(e) एनोड (Anodes) – शुद्ध कॉपर के

(f) टंकी (Tank) – स्टील की बनी हुई 

(g) ब्राइटनर – सोडियम थायोसल्फेट 1.59 ग्राम प्रति लीटर 

(h) फ्री सायनाइड – 75 ग्राम प्रति लीटर 

कुछ समय काम ले लेने के बाद सायनाइड के विच्छेदन के कारण घोल में कार्बोनेट्स की मात्रा बढ़ जाती है। यदि यह मात्रा अधिक हो जाती है तो अधिक कार्बोनेट को टंकी की तली में लोहे की ट्रे रखकर यदि घोल को ठण्डा किया जाए तो कार्बोनेट ट्रे में बैठ जाते हैं। अधिक सायनाइड को कम करने के लिए घोल में कॉपर कार्बोनेट मिला देना चाहिए ।

यह आवश्यक है कि फ्री सायनाइड की मात्रा पर ठीक से नियन्त्रण रखा जाय । यदि सायनाइड बहुत कम हैं तो एनोड ठीक तरह नहीं घुलेंगे और उनके ऊपर हरे रंग का पदार्थ जम जायगा जिसके कारण घोल की रेजिस्टेंस बढ़ जायगी तथा एफीशियेन्सी घट जायगी। 

यदि फ्री सायनाइड बहुत अधिक है तो जो प्लेटिंग होगा उसमें छाले जैसे बन जायेंगे और केथोड पर से बहुत गैस निकलेगी तथा करेन्ट एफीशयेन्सी घट जायगी। अगर इस प्लेटिंग को आक्सीडाइज भी करना हो तो घोल में बाइटनर नहीं मिलाना चाहिए अन्यथा यह रंग को अच्छी तरह नहीं पकड़ेगा । कास्ट बायरन पर प्लेटिंग करते समय फी सायनाइड की मात्रा कम कर देनी चाहिए।

3. कॉपर रोचेल बाथ (Copper Rochelle Bath)

जिंक और जिंक मिश्रित (Zink based) धातुओं पर बहुत हल्की तांबे की परत जमाने के लिए कॉपर रोचेल बाथ / घोल का प्रयोग आमतौर पर किया जाता। वैसे स्टील आदि अन्य धातुओं पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है । 

जिंक आदि मुलायम धातुओं पर अण्डर कोटिंग के रूप में इस बाथ द्वारा पतली सतह (thin layer) चढ़ाकर उसके ऊपर दूसरे बाथों द्वारा मोटी लेयर चढ़ाई जाती है। इस बाथ द्वारा मोटी सतह भी चढ़ाई जा सकती है परन्तु यह काफी महंगा पड़ता है अतः इसका प्रयोग मोटी तह जमाने के लिए कम ही किया जाता है । इस बाथ का स्ण्टेडर्ड फार्मूला इस प्रकार है

(A) रोचेले साल्ट (KNaC,H.0.4H,) – 50 ग्राम 

(B) सोडियम कार्बोनेट (Na,Cos) – 38 ग्राम 

(C) सोडियम सायनाइड (NaCN) – 37.5 ग्राम 

(D) कॉपर सायनाइड (CuCN) – 30 ग्राम 

(F) पानी (Distiled Water) 1 लीटर

परिचालन की बादशं स्थितियां (Working Conditions)

(a) बाथ का तापमान (Temp. of Bath) ) – 120°-160° फार्न०

(b) करेन्ट डेन्सिटी (C. D.) – 200-600 ऐम्पीयर मीटर करेन्ट ऐफीशियेन्सी (C. E.) – 50-60%

(c) वोल्टेज (Voltage) – दो से तीन के मध्य 

(d) पी० एच० (pH) – 122 से 12.8 तक 

(e) एनोड (Anodes) – रोल्ड कॉपर और एनोल्ड के 

(f) टंकी (Tank) – स्टील (steel) की 

(g) फ्री सायनाइड (Free Cyanide) – तीन से छह ग्राम प्रति लीटर 

इलेक्ट्रोप्लेटिंग की विशेष सावधानियां (Precautions of electroplating)

कॉपर प्लेटिंग चमकदार जमे इसके लिए घोल की पी० एच० वैल्यू (pH value) ऊंची, लगभग 12.8, रखनी चाहिए और घोल को हिलाते रहना चाहिए । तापक्रम तथा करेन्ट डेन्सिटी पर भी नियन्त्रण नितान्त आवश्यक है।

कार्बोनेट मात्रा 40 ग्राम प्रति लीटर अर्थात् 9 औंस प्रति गैलन से अधिक नहीं बढ़ने देनी चाहिए अन्यथा एनोड एफीशियन्सी गिर जायेगी । लेकिन साथ-ही-साथ कार्बोनेट की मात्रा 12 ग्राम प्रतिलीटर अथवा 2 या 3 बीस प्रति गैलन से कम भी नहीं रहनी चाहिए अन्यथा घोल स्टील की टंकी को काटने लगेगा। घोल में से कार्योनेट निकालने या कम करने के लिए वही विधि है जो कॉपर सायनाइड बाथ में ऊपर बतलाई गई है।

जिक एलायज पर प्लेटिंग करने में इसके अन्दर फ्री सायनाइड की मात्रा पर पूर्ण नियन्त्रण रखना चाहिए और इसकी मात्रा कभी भी चार ग्राम प्रति लीटर या एक औंस प्रति गैलन से अधिक नहीं रहनी चाहिए अन्यथा प्लेटिंग में छाले जैसे पड़ जाएंगे तथा इसकी pH वैल्यू पर भी नियन्त्रण रखना चाहिए। 

घोल में कास्टिक सोडा मिलाने की आवश्यकता तब पड़ती है जब यह वैल्यू बहुत कम हो । अगर वैल्यू बहुत ऊंची है तो सल्फ्यूरिक या टारटरिक एसिड मिलाना चाहिए। यदि एसिड मिलाया जाय तो पहले अलग बर्तन में एसिड में काफी पानी मिलाकर उसे हल्का करने के बाद (डाइल्यूट करके) फिर घोल में मिलाना चाहिए। 

4. आईनों (mirrors) के लिए कॉपर बाथ (Copper Bath for Mirrors)

इस घोल या बाथ का प्रयोग मुंह देखने के शीशों-दर्पण, आइना, मिरर या लुकिंग ग्लास-की पिछली और चांदी की पतली चढ़ाई गई सतह को मजबूती व स्थिरता प्रदान करने के लिए किया जाता है। इस बाथ से तांबे की बहुत हल्की व पतली परत जमती है, मोटी प्लेटिंग करने के लिए इस बाथ का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

(A) कापर सल्फेट (Copper Sulphate) – 15 ग्राम

(B) ट्राई ईथानोलामाइन (Tri Ithanolamine) – 22 ग्राम 

(C) सोडियम आक्सेलेट (Sodium Oxalate) – 10 ग्राम 

(D)शुद्ध जल (Distiled Water) – एक लीटर

परिचालन शर्ते व विधि (Working Conditions)

(a) बाथ का तापक्रम (Temperature) – सामान्य (रूम टेम्प्रेचर) 

(b) करेण्ट डेन्सिटी (Current Density) – 36 एम्पी० प्रति वर्ग मीटर 

(c) करेण्ट एफीशियेन्सी (Current-efficiency) सत प्रतिशत

(d) एनोड (Anodes) – शुद्ध तांबे के

इस बाथ का प्रयोग पत्थर की बनी हुई अथवा रबर का अस्तर लगी हुई लोहे या लकड़ी की टंकी में किया जा सकता है। यह घोल मात्र आधे मिनिट से लेकर एक मिनिट के अन्दर-अन्दर दर्पण की सतह पर जमी हुई चांदी की परत पर यथेष्ठ मोटी कॉपर की सतह जमाने में समर्थ रहता है ।

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5. फल्यूबोरेट कॉपर बाथ (Fluoborate Copper Baths)

वास्तव में फल्यूबोरेट कॉपर बाथ एसिड बाथ का ही परिष्कृत व पूर्ण रूप है और अधिकांश धातुओं की सतह को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता अतः लगभग सभी धातुओं पर कॉपर प्लेटिंग करने के लिए इसका प्रयोग किया जा सकता है। यह बाथ अत्यधिक मृदु और मध्यम स्तर तक तीष्ण या शक्तिशाली बनाया जा सकता है। 

नीचे मृदुतम या सबसे हल्के (weak or light) और अधिकतम संभव शक्तिशाली (strong) बाथ बनाने के दो फार्मूले दिए जा रहे हैं। इनसे आप मृदु व शक्तिशाली बाथ तो बना ही सकते हैं बाथ तैयार करते समय एक ही अनुपात में सभी रचकों की मात्रा घटा या बढ़ाकर विविध क्षमताओं के मध्यम स्तरीय बाथ भी तैयार कर सकते हैं। 

मृदु फ्ल्यूबोरेट बाय (The Light Bath) 

(A) कॉपर फ्ल्यूबोरेट (Copper Fluoborate) – 225 ग्राम 

(B) फ्ल्यूबोरिक एसिड (Fluoboric Acid) – 15 ग्राम 

(C) बोरिक एसिड (Boric Acid) – 15 ग्राम 

(D) डिस्टिल्ड वाटर (Distiled Water) – 1 लीटर

(E) शक्तिशाली फ्ल्यूबोरेट बाथ (The Strong Bath) 

(F) कॉपर फ्ल्यूबोरेट (Copper Fluoborate) – 450 ग्राम 

(G) फ्ल्यूबोरिक एसिड (Fluoboric Acid) – 30 ग्राम 

(H) बोरिक एसिड (Boric Acid) ) – 30 ग्राम 

(I)डिस्टल वाटर (Distiled Water) 1 लीटर

परिचालन शर्ते व प्रयोग विधि (How to use)

आप हल्का बाथ बनाएं या शक्तिशाली या फिर मध्यम स्तर का सभी परिचालन स्थितियां, प्रयोग विधि और सावधानियां वही रहेंगी जो एसिड बेस्ड बाथ (बाथ नंबर 1) का प्रयोग करते समय प्रयोग की जाती हैं। सामान्य एसिड बाथ से यह बाथ अधिक सुरक्षित तो है परन्तु बहुत महंगा पड़ता है अतः इसका प्रयोग विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है।

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इस आर्टिकल में कोपर प्लेटिंग / कॉपर इलेक्ट्रोप्लेटिंग की पूरी जानकारी देने की कोशिश की गई है।

आगे आने वाले आर्टिकल में हम बात करेंगे जिंक इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बारे में।

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